
ट्यूबरकुलोसिस (टीबी): लक्षण, कारण, बचाव और पूरा इलाज जानें — जान बचा सकती है ये जानकारी
क्या आपको या आपके किसी अपने को लंबे समय से खांसी, बुखार और कमजोरी की समस्या है? इसे हल्के में मत लीजिए, क्योंकि ये लक्षण हो सकते हैं ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के।
भारत में हर साल लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि सही समय पर इलाज और जानकारी से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
इस लेख में हम आपको बताएंगे — टीबी के लक्षण, कारण, बचाव के तरीके, इलाज और ज़रूरी लाइफस्टाइल टिप्स ताकि आप और आपके अपने सुरक्षित रहें।
ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) क्या है?
टीबी (Tuberculosis) एक गंभीर और संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों (Lungs) को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, जैसे हड्डी, किडनी, रीढ़ या ब्रेन।
यह बीमारी खांसने, छींकने और थूकने के ज़रिए एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।
टीबी के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis)
टीबी के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन अगर 2 हफ्ते से ज़्यादा बने रहें तो जांच ज़रूर कराएं।
लगातार 2 हफ्ते या उससे ज़्यादा खांसी
बलगम में खून आना
वजन तेजी से घटना
तेज बुखार और रात में पसीना
भूख न लगना
सांस लेने में तकलीफ
थकान और कमजोरी
नोट: अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो जल्द से जल्द नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
टीबी होने के कारण (Causes of Tuberculosis)
टीबी का संक्रमण तब फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या थूकता है, और उसके बैक्टीरिया हवा के ज़रिए किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाते हैं।
अधिक जोखिम किन्हें होता है?
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
- HIV/AIDS के मरीज
- कुपोषण (Malnutrition) से ग्रस्त लोग
- डायबिटीज के मरीज
- तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले
- ऐसे लोग जो टीबी मरीज के संपर्क में रहते हैं
टीबी का इलाज (Tuberculosis Treatment)
टीबी का इलाज बिल्कुल संभव है, लेकिन इसे पूरा कोर्स करना बहुत ज़रूरी है। भारत में सरकार द्वारा डॉट्स (DOTS) नामक फ्री इलाज योजना चलाई जाती है।
टीबी का स्टैंडर्ड इलाज:
- 6 से 9 महीने तक चलने वाली एंटी-टीबी दवाइयां (Anti-Tuberculosis Medicines)
- इलाज में मुख्य दवाइयां: Isoniazid, Rifampicin, Pyrazinamide, Ethambutol
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना खतरनाक है।
ड्रग-रेज़िस्टेंट टीबी (MDR-TB) का इलाज:
अगर कोई मरीज बीच में इलाज छोड़ देता है, तो बैक्टीरिया दवाइयों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है, जिसे मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी कहा जाता है। इसका इलाज लंबा और जटिल होता है।
टीबी में जरूरी लाइफस्टाइल और डाइट टिप्स
सिर्फ दवाइयां ही नहीं, सही लाइफस्टाइल और पोषण भी टीबी से रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है।
क्या करें:
- पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें: प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स
- दूध, अंडा, हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, दालें ज़रूर शामिल करें।
- दिन में 6-7 घंटे की नींद लें।
- रोज़ हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
- धूप में कुछ देर बैठें (Vitamin D के लिए)
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा इलाज करें।
क्या न करें:
- तंबाकू, शराब और जंक फूड से बचें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां बंद न करें।
- संक्रमित व्यक्ति से बिना सुरक्षा के संपर्क न करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर समय रहते पहचान कर ली जाए और पूरा इलाज किया जाए, तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है।
जरूरत है सजग रहने की और लक्षणों को हल्के में न लेने की। साथ ही अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना भी बेहद ज़रूरी है।
याद रखें — टीबी को हराना है, तो कोर्स पूरा करना है।
टीबी से जुड़ी अहम FAQs
Q. क्या टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है?
हां, अगर समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए और पूरा कोर्स किया जाए तो टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है।
Q. क्या टीबी एक बार होने के बाद फिर हो सकती है?
अगर इम्यूनिटी कमजोर हो या इलाज पूरा न किया हो, तो दोबारा भी हो सकती है।
Q. क्या टीबी का इलाज फ्री है?
हां, भारत सरकार द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉट्स प्रोग्राम के तहत फ्री इलाज और दवाइयां उपलब्ध हैं।
Q. टीबी में कौन-से टेस्ट कराए जाते हैं?
बलगम जांच, सीबी-नाट टेस्ट (CB-NAAT), एक्स-रे, ब्लड टेस्ट और कुछ मामलों में MRI या CT Scan भी कराए जाते हैं।
Q. क्या टीबी बच्चों को भी हो सकती है?
हां, इसलिए बच्चों को BCG वैक्सीन देना ज़रूरी होता है, जो टीबी से बचाव में मदद करती है।