बिलीरुबिन परीक्षण: उच्च और निम्न स्तर आपके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं
क्या आपने कभी ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट में Bilirubin का स्तर देखकर चिंता महसूस की है?
बिलीरुबिन शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक पिग्मेंट है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के टूटने पर पैदा होता है। सामान्य स्तर पर यह हमारे शरीर से लिवर के माध्यम से पित्त (bile) में निकल जाता है। लेकिन अगर इसका स्तर बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाए, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए चेतावनी संकेत हो सकता है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बिलीरुबिन क्या है, इसके स्तर क्यों बदलते हैं, किन बीमारियों का संकेत देते हैं, और इसे नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली व इलाज क्या हो सकते हैं।
बिलीरुबिन क्या है?
- यह एक पीले रंग का पिग्मेंट है।
- शरीर में जब पुरानी RBCs टूटती हैं, तो हीमोग्लोबिन के विघटन से बिलीरुबिन बनता है।
- लिवर इसे प्रोसेस कर पित्त के जरिए आंतों तक पहुंचाता है और शरीर से बाहर निकालता है।
बिलीरुबिन के सामान्य स्तर (Normal Range)
- Total Bilirubin: 0.3 – 1.2 mg/dL
- Direct (Conjugated) Bilirubin: 0.1 – 0.3 mg/dL
- Indirect (Unconjugated) Bilirubin: 0.2 – 0.8 mg/dL
उच्च बिलीरुबिन स्तर (High Bilirubin Level) के कारण
- लिवर रोग – हेपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर इंफेक्शन
- जॉन्डिस (पीलिया) – आंख और त्वचा पीली होना
- गॉलब्लैडर की समस्या – पित्ताशय में पथरी (Gallstones)
- RBC का तेजी से टूटना – हेमोलाइटिक एनीमिया
- लिवर एंजाइम की गड़बड़ी
निम्न बिलीरुबिन स्तर (Low Bilirubin Level) के कारण
हालांकि यह कम ही देखने को मिलता है, लेकिन बहुत कम स्तर इन समस्याओं से जुड़ा हो सकता है:
- कुछ दवाओं का असर
- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की स्थिति
- पोषण की कमी
बिलीरुबिन बढ़ने पर लक्षण (Symptoms of High Bilirubin)
- आंख और त्वचा का पीला होना
- थकान और कमजोरी
- भूख कम लगना
- मतली या उल्टी
- गहरे रंग का पेशाब
- पेट में दर्द या सूजन
बिलीरुबिन की जांच (Bilirubin Test / LFT Test)
- यह टेस्ट आमतौर पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) का हिस्सा होता है।
- ब्लड सैंपल लेकर इसकी माप की जाती है।
- रिपोर्ट में बढ़े स्तर लिवर या खून से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं।
लाइफस्टाइल टिप्स (Lifestyle Tips to Maintain Healthy Bilirubin Levels)
- हेल्दी डाइट लें – हरी सब्जियां, फल, एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार
- अत्यधिक शराब से बचें – यह लिवर पर सीधा असर डालती है
- पर्याप्त पानी पिएं – शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद
- नियमित व्यायाम करें – मेटाबॉलिज्म और लिवर हेल्थ बेहतर होती है
- दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें
मेडिकल ट्रीटमेंट (Medical Treatment Options)
अगर रिपोर्ट में बिलीरुबिन स्तर असामान्य है, तो डॉक्टर निम्नलिखित इलाज सुझा सकते हैं:
- दवाइयां – लिवर और पित्ताशय की समस्याओं के अनुसार
- लिवर इंफेक्शन का इलाज – एंटीवायरल/एंटीबायोटिक
- गॉलब्लैडर सर्जरी – पथरी या अवरोध की स्थिति में
- फोटोथेरपी (Phototherapy) – नवजात शिशुओं में उच्च बिलीरुबिन (Neonatal Jaundice) के लिए
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन – गंभीर एनीमिया या हेमोलाइटिक समस्या में
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. बिलीरुबिन बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
इसका सबसे आम कारण लिवर की बीमारी या पीलिया है।
Q2. क्या बिलीरुबिन बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
हाँ, क्योंकि यह लिवर, गॉलब्लैडर या खून की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
Q3. क्या घर पर बिलीरुबिन कम किया जा सकता है?
हेल्दी डाइट, हाइड्रेशन और शराब से परहेज मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर स्थिति में मेडिकल ट्रीटमेंट ज़रूरी है।
Q4. क्या बच्चों में भी बिलीरुबिन टेस्ट होता है?
हाँ, खासकर नवजात शिशुओं में पीलिया होने पर।
निष्कर्ष
बिलीरुबिन स्तर आपके शरीर और लिवर की सेहत का दर्पण है।
अगर आपकी रिपोर्ट में इसका स्तर बहुत ज्यादा या बहुत कम है, तो इसे हल्के में न लें। समय रहते डॉक्टर से परामर्श, सही जांच और इलाज आपके स्वास्थ्य को गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।
याद रखें, आपकी सेहत सबसे कीमती निवेश है। अगर आपको पीलिया, थकान, आंख या त्वचा पीली होने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत लिवर स्पेशलिस्ट से संपर्क करें।


