
ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT): डायबिटीज़ की शुरुआती पहचान का भरोसेमंद तरीका
क्या आप थकान, अधिक प्यास या बार-बार पेशाब जाने की समस्या से जूझ रहे हैं? ये लक्षण डायबिटीज़ के संकेत हो सकते हैं – और उसे समय रहते पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT)।
GTT एक ऐसा ब्लड टेस्ट है, जो यह जांचने में मदद करता है कि आपका शरीर ग्लूकोज को कितनी प्रभावी तरीके से प्रोसेस करता है। यह टेस्ट खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है जिनमें टाइप 2 डायबिटीज़, प्री-डायबिटिक स्थिति या गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज़ का खतरा हो।
समय पर टेस्ट करवा कर आप डायबिटीज़ को रोक सकते हैं, कंट्रोल कर सकते हैं और भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं।
GTT टेस्ट का उद्देश्य क्या है?
- टाइप 2 डायबिटीज़ की शुरुआती पहचान
- प्री-डायबिटिक स्थिति की पुष्टि
- गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज़ का मूल्यांकन
- इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच
- बार-बार हाई शुगर लेवल के कारणों का पता लगाना
GTT कैसे किया जाता है? (प्रक्रिया):
- व्यक्ति को टेस्ट से पहले कम से कम 8 घंटे का उपवास करना होता है।
- पहला ब्लड सैंपल फास्टिंग में लिया जाता है।
- इसके बाद व्यक्ति को 75 ग्राम ग्लूकोज युक्त घोल दिया जाता है।
- फिर 1 घंटे और 2 घंटे बाद दोबारा ब्लड सैंपल लिए जाते हैं।
- इन सैंपल्स के जरिए यह देखा जाता है कि शरीर कितनी तेजी से ग्लूकोज को प्रोसेस करता है।
GTT के सामान्य मान (Normal Values):
140-199 mg/dL – प्री-डायबिटीज़ की स्थिति हो सकती है
≥ 200 mg/dL – डायबिटीज़ का स्पष्ट संकेत
GTT कब करवाना चाहिए?
- परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो
- मोटापा या BMI 25 से अधिक हो
- हाई BP या कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो
- गर्भवती महिला की उम्र 25 वर्ष से अधिक हो
- पहले जेस्टेशनल डायबिटीज़ रह चुकी हो
- थकान, बार-बार पेशाब और ज्यादा प्यास जैसे लक्षण दिखें
लाइफस्टाइल टिप्स डायबिटीज़ से बचाव के लिए:
- रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक करें
- प्रोसेस्ड और मीठी चीज़ों से दूरी बनाए रखें
- साबुत अनाज, हरी सब्ज़ियां, दालें, मेवे और फल को डाइट में शामिल करें
- वज़न नियंत्रित रखें और रेगुलर BMI जांचें
- तनाव से बचें – मेडिटेशन और नींद पर ध्यान दें
- हर 6 महीने में ब्लड शुगर और GTT जैसे टेस्ट करवाते रहें
अगर GTT में शुगर लेवल हाई आए तो क्या करें? (मेडिकल उपचार विकल्प)
- डायबिटोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें
- HbA1c और FBS/RBS जैसे अन्य ब्लड शुगर टेस्ट कराएं
- डॉक्टर के अनुसार डाइट चार्ट और एक्सरसाइज़ रूटीन अपनाएं
- गंभीर स्थिति में मेटफॉर्मिन या अन्य एंटी-डायबिटिक दवाइयों की जरूरत हो सकती है
- गर्भवती महिलाओं में इंसुलिन इंजेक्शन दिए जा सकते हैं
कभी भी अपने आप दवा शुरू न करें – पूरी मेडिकल गाइडेंस लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
Q1. GTT टेस्ट के लिए कितना समय लगता है?
लगभग 2.5 से 3 घंटे।
Q2. क्या GTT के लिए फास्टिंग जरूरी है?
हाँ, कम से कम 8 घंटे का उपवास जरूरी है।
Q3. क्या GTT टेस्ट प्रेग्नेंसी में सुरक्षित है?
बिलकुल। गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज़ की जांच के लिए यह जरूरी होता है।
Q4. क्या GTT महंगा टेस्ट है?
नहीं, यह एक किफायती टेस्ट है और लगभग सभी डायग्नोस्टिक लैब्स में उपलब्ध है।
Q5. क्या टेस्ट से पहले दवा लेना बंद करनी चाहिए?
कुछ दवाइयाँ टेस्ट को प्रभावित कर सकती हैं – डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
निष्कर्ष:
GTT यानी ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट एक छोटा टेस्ट है लेकिन बड़ा असर करता है। यह आपको डायबिटीज़ की शुरुआत पहचानने का समय देता है ताकि आप समय रहते ज़रूरी कदम उठा सकें।
आपका एक टेस्ट आपके पूरे जीवन को सुरक्षित बना सकता है।
आज ही GTT टेस्ट कराएं और अपने शुगर लेवल पर नियंत्रण पाएं – क्योंकि सेहत से बड़ा कोई निवेश नहीं।